बोधगया में घुमना ज्ञान के नगरी में घुमने के जैसा है। यहां पर का हर स्थान किसी न किसी रूप से भगवान बुद्ध के कार्यों से जुडा रहा है। ज्ञान लेकर घुमना ऐसा है जैसे कि पहले से पढ़कर किसी कक्षा में पढ़ना।
महाबोधि वृक्ष का दर्शन बौद्ध पर्यटकों के लिए परम सौभग्य का विषय है। यहां पर आने वाले पर्यटक को बोधगया के स्थान के बारे में जरुर जानना चाहिए
भगवान बुद्ध ने वैशाख पूर्णमा के दिन ज्ञान प्राप्त किया। वे बिहार के बोधगया में ज्ञान पाये। और पहला उपदेश वे सारनाथ (उत्तर प्रदेश) में दिये। ज्ञान प्राप्ति और प्रथम उपदेश देने के बीच तीन महीना का अंतर है। इन तीन महीने में तो वे सात सप्ताह तक बोधगया में ही रहे। और सात सप्ताह में सात महाबोधि परिसर के सात विभिन्न स्थानों पर सात अलग अलग कार्य किये।
चौथे सप्ताह
चौथे सप्ताह में, बुद्ध ने जिस स्थान पर पुरा सप्ताह बिताया उसका नाम है रत्न गृह चैत्य। रत्न का अर्थ है ज्ञान रूपी रत्न। बौद्ध धर्म अपने ज्ञान विधि और दर्शन के कारण ही पुरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ। भगवान बुद्ध ने मध्यम मार्ग की खोज की। वे न तो अत्यंत कठोर पथ को अपनाने को कहे और न ही अपना जीवन बिल्कुल ही सुख सुविधाओं से घिरे होकर बिताने को कहा। ज्ञान प्राप्ति के बाद 45 वर्षों तक वे धम्म की वर्षा लोगों के लिए पैदल चलकर किये।
इसी स्थान पर वे बौद्ध धर्म के सबसे गंभीर दर्शन अभिधम्म पर विचार किये।
देवताओं ने बनाया यह चैत्य
पालि साहित्य में इस प्रकार से वर्णन आता है कि इस स्थान को देवताओं ने बनाया है। पालि साहित्य के कई ग्रन्थ में देवताओं का जिक्र आता है। भगवान बुद्ध कोई भी कार्य किये वहां पर देवताओं ने अपना उपस्थिति दर्ज करायी और यथासंभव बुद्ध की मदद भी की।
अभिधम्म पिटक पर चिंतन-मनन किया
इस स्थान पर भगवान बुद्ध ने एक सप्ताह तक अभिधम्म पर चिंतन-मनन किया। चौथे सप्ताह को ही अभिधम्म की प्राप्ति का काल कहा जाता है। बौद्ध साहित्य में सबसे प्राचीन साहित्य है पालि साहित्य। बुद्ध वचन सबसे पहले इसी भाषा में संरक्षित किया गया। पालि भाषा में सभी बुद्ध वचन को तीन पिटक में बांटा गया है: सुत्त पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक।
सुत्त पिटक भगवान बुद्ध के द्वारा सामान्य जन को गये उपदेश का संग्रह है।
विनयपिटक में उन उपदेशों का संग्रह है जो भगवान बुद्ध ने केवल संघ के लागों – भिक्षु और भिक्षुणिओं – के लिये दिये हैं।
अभिधम्म पिटक बौद्ध धम्म के गंभीर उपेदश का संग्रह है। यह पिटक में बौद्ध धम्म के सामान्य बातों के दार्शनिक पक्ष को विस्तार से बताया गया है।
जैसे कि मानव शरीर को सुत्त पिटक और विनय पिटक में केवल काया कहा गया है उसी काया को समझाने के लिए अभिधम्म पिटक में 32 भागों में बांटकर समझाया गया है।
बोधि वृक्ष के पास
बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सात सप्ताह तक बोधगया में रुके। इनमें से चार सप्ताह तक वे बोधि वृक्ष के ही आस पास रहे। अंतीम तीन सप्ताह वे बोधि वृक्ष से थोडा दूरी पर रहे।
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